By | September 15, 2020

दोस्तों आज हम बात करने बाले है डायलिसिस के बारे में डायलिसिस किडनी रोगी के लिए सुरक्षित होता है

कोरोना काल में ऐसे किडनी रोगियों के लिए बड़ी मुश्किल हो रही है, जो डायलिसिस पर हैं। ऐसे में पेरिटोनियल डायलिसिस एक सुरक्षित और असरदार माध्यम हो सकता है।

Best Health Tips (2020) डायलिसिस किडनी रोगी के लिए सुरक्षित

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर और डायबिटीज से ग्रस्त मरीजों को कोविड संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है। कोविड-19 के लगातार बढ़ते पॉजिटिव मामलों ने डायलिसिस मरीजों में डर पैदा कर दिया है। वे लंबी दूरी तय करके हफ्ते में दो-तीन बार डायलिसिस सेंटरजाते हैं, जिसका उनकी जेब और स्वास्थ्य पर गंभीर

प्रभाव पड़ता है। भारत में डायलिसिस की मांग 31 प्रतिशत की दर से बढ़ती जा रही है। इसमें सालाना तीन-चार लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। कई बार हॉस्पिटल किसी मरीज के कोविड-19 पॉजिटिव आने पर अपनी डायलिसिस यूनिट को बंद कर देता है। इससे डायलिसिस रोगियों के सामने बड़ी दिक्कत पैदा हो जाती है।

घातक वायरस को फैलने से रोकने के लिए हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण एंड स्टेज रीनल डिजीज (ईएसआरडी), से ग्रस्त मरीजों की हालत बदतर हुई है। यह ऐसी बीमारी है, जो भारत में 2.2 लाख नए रोगी पैदा करती है। इसमें हर साल 3.4 करोड़ डायलिसिस की अतिरिक्त मांग होती है और इसमें कोविड-19 संकट से फैली समस्याओं की गिनती तक नहीं की गई है।

बेहद आसान है ये थेरेपी

इसके लिए नजदीकी चिकित्सा पर्यवेक्षण की जरूरत नहीं है। इसमें नाड़ी को छूने या सुई लगाने की जरूरत नहीं होती, तो दर्द भी नहीं होता। यह सोने के दौरान भी की जा सकती है और यह जटिल नहीं है। पीडी (पेरिटोनियल डायलिसिस) के साथ क्रोनिक किडनी डिजीज को कंट्रोल में रखा जा सकता है।

क्रॉनिक किडनी रोगों के कारण किडनी समय के साथ काम करना बंद कर देती है या केवल 10 प्रतिशत तक ही काम करवाती है। ऐसे में डायलिसिस की जरूरत होती है। इन बीमारियों का कोई इलाज नहीं है। केवल उपचार के जरिये लक्षणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर दवाओं, डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं

उपलब्धता है आसान

पीडी को घर, दफ्तर या यात्रा के दौरान साफ और निजी स्थान पर उपलब्ध कराया जा सकता है। शरीर में खून को छानने के लिए इसमें पेट या उदर की लाइनिंग का इस्तेमाल होता है। सर्जरी पीडी शुरू करने के कुछ हफ्ते पहले मरीज के पेट में एक सॉफ्ट ट्यूब लगाता है, जिसे कैथेटर कहते हैं। इलाज शुरू होता है, तो नमक और अन्य एडिटिव्स का घोल डायलिसैट कैथेटर के जरिये थैली से मरीज के पेट में जाता है।

थैली खाली होने पर इसे हटाने की जरूरत होती है और कैथेटर पर ढक्कन लगाना पड़ता है। जब डायलिसिस घोल पेट के अंदर है, तो यह शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त द्रव्य को अवशोषित करता है। घर पर डायलिसिस में पर्याप्त स्वच्छता बरतनी होती है, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो। इस्तेमाल डायलिसैट को नाली में फेंकने की सलाह दी जाती है।

प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम (पीएमएनडीपी) ने पीडी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नीति में शामिल किया है, जो गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को डायलिसिस मुफ्त में उपलब्ध कराती है।

दोस्तों आपको हमारी “डायलिसिस किडनी रोगी के लिए सुरक्षित” वाली  पोस्ट कैसी लगी अपनी राय कमेन्ट बॉक्स में जरुर डाले|

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