By | September 7, 2020

दोस्तों आज हम बात करने वाले है डिप्थीरिया के बारे में और हम जानेगे डिप्थीरिया क्या है- डिप्थीरिया के लक्षण, रोकथाम, उपचार के बारे में  तो चलये शुरु करते है

 डिप्थीरिया क्या है : डिप्थीरिया के लक्षण, रोकथाम, उपचार

भारत में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर पहुंच गया है। रोज नए मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में सावधानी और अपना बचाव जरूरी है लेकिन इस क्रम में यह न भूले कि बरसाती मौसम में गंदगी और जानकारी के अभाव में कुछ अन्य संक्रमण भी फैल रहे है। डिप्थीरिया इन्हीं में एक है, जो खासतौर पर बच्चों में ज्यादा दिखता है। इससे बचाव और वैक्सीनेशन क्यों जरूरी है, बता रहे हैं विशेषज्ञ

कोविड-19 संक्रमण अभी भारत में चरम पर है। ऐसे में सांस संबंधी अन्य बीमारियां, खांसी, बुखार भी अतिरिक्त डर का माहौल बना देती हैं। कोरोना से बचाव के साथ-साथ मौसमी बीमारियों व संक्रमणों से खुद को बचाना जरूरी है। फिलहाल लोग कोरोना के डर से इतने ग्रस्त हैं कि अन्य संक्रमणों पर ध्यान ही नहीं दे पा रहे हैं। ऐसा ही एक रोग है डिप्थीरिया, जो एक तरह का बैक्टीरियल रोग है और यह बरसात के मौसम में बच्चों को तेजी से घेरता है। इस रोग में गले में गांठ सी होने लगती है, साथ में तेज बुखार, गले में खराश या दर्द और सिरदर्द होता है।

1. इम्युनिटी कम हो तो बढ़ता है खतरा

डिप्थीरिया से बचाने के लिए बचपन में ही डीपीटी का टीका लगाया जाता है। इसके बावजूद डब्यूएचओ के अनुसार, भारत के आंकड़े इस बीमारी के विषय में चिंताजनक हैं। डिप्थीरिया 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक होने वाला रोग है। वयस्कों को भी यह होता है, लेकिन ऐसे मामले कम देखने को मिलते हैं। वयस्कों में डिप्थीरिया होने का कारण बचपन में टीका नलगना, इम्युनिटी कमजोर होना आदि हैं। बच्चों को इसका खतरा सबसे ज्यादा है।

2. डिप्थीरिया क्यो होता है

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के पल्मोनरी सलाहकार डॉ. नवनीत सूद कहते हैं, ‘डिप्थीरिया कोराइन बैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक प्रकार का रोग है, जिसका संक्रमण गले में होता है। इस संक्रमण के गले में फैलने के कारण एक लेयर बन जाती है, जो गांठों में तब्दील हो जाती है।

इसके कारण सांस की नली अवरुद्ध हो जाती है और फेफड़ों को मिलने वाली ऑक्सीजन पर प्रभाव पड़ता है, जिस कारण निश्चित तौर पर सांस लेने में तकलीफ होती है। इसमें रोगी को बहुत तेज बुखार और गले में असहनीय पीड़ा होती है। इसके गंभीर मामलों में निमोनिया और हृदय पर भी असर हो सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण शरीर के अन्य अंगों में भी फैल सकता है।’

3. डिप्थीरिया के लक्षण

  • गले में परत जमना, गांठें हो जाना आदि।
  • तेज बुखार।
  • आवाज में बदलाव महसूस होना।
  • तकलीफदेह खांसी और बोलने में दिक्कत।
  • खाना निगलने में तकलीफ।
  • कमजोरी महसूस होना।

4. कैसे फैलता है डिप्थीरिया

इसका संक्रमण अधिकतर गंदगी वाली जगहों में रहने वाले बच्चों में देखा जाता है। गरीबी और स्वास्थ्य जागरूकता का अभाव इसका प्रमुख कारण है। बारिश के मौसम में इसका संक्रमण आम दिनों की अपेक्षा बढ़ जाता है। संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने पर अन्य बच्चों में भी यह फैल सकता है। ये जीवाणु रोगी के मुंह, नाक और गले में हो सकते हैं और खांसने या छींकने से फैल सकते हैं। ऐसे में रोगी के पूरी तरह ठीक होने तक दूसरे बच्चों को भी संपर्क में लाने से बचना चाहिए।

इससे बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है, साथ ही बच्चों की इम्युनिटी भी बहुत जरूरी है। डिप्थीरिया का इलाज संभव है। इसमें डॉक्टर एंटीबायोटिक का कोर्स कराते हैं, ताकि शरीर में जमा बैक्टीरिया खत्म हो जाएं। गंभीर स्थिति में कभी-कभी हॉस्पिटल में भर्ती होने की नौबत भी आ सकती है।

5. डिप्थीरिया की रोकथाम

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट की पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ.जसमीत कौर वाधवा कहती हैं कि डिप्थीरिया से बचाव के लिए बच्चों को डीपीटी का टीका लगाया जाता है, जिसके कुछ डोज समय-समय पर दिए जाते हैं। छह महीने की आयु तक इसके तीन डोज, जो दो-दो महीने के अंतराल पर दिए जाते हैं। इसके बाद 18 महीने पर एक डोज, 5 साल और 10 साल की उम्र में बूस्टर डोज दिए जाते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी डोज छूटने पर संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। साथ ही डिप्थीरिया का गंभीर जोखिम दो वर्ष तक की आयु के बच्चे में सबसे अधिक होता है। याद रखें यह मामूली खांसी, जुकाम से शुरू होता है और समस्या बढ़ जाए या गंभीर हो जाए, तो गले में गांठ, निमोनिया, हृदय रोग, मस्तिष्क ज्वर और लकवा जैसे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसका टीकाकरण पूरा कराएं और कोई भी डोज न छोड़ें।

6. कोविड 19 और डिप्थीरिया

बहुत मुमकिन है कि डिप्थीरिया के शुरुआती लक्षण कोविड 19 के लक्षणों से मिलते-जुलते हों। ऐसे में इसके प्रति बचाव सुनिश्चित करना जरूरी है। बच्चों में ऐसा कोई भी लक्षण दिखने पर सबसे पहले तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और संबंधित जांच द्वारा सही बीमारी की पहचान करवा कर इलाज शुरू करें। यदि किसी कारणवश डिप्थीरिया होने की पुष्टि हो, तो भी घबराएं नहीं, डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का पालन करें और बच्चों का ध्यान रखें ।

कोविड संक्रमण का यह दौर सबके लिए कठिनाई भरा है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग, बार बार हाथ धोना और बाहर निकलने पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है। बच्चों को सफाई के प्रति जागरूक बनाएं, उन्हें अकेले घर से बाहर न निकलने दें, लेकिन कोविड के खौफ में ये न भूलें कि कुछ और बीमारियां भी इस समय पैदा हो सकती हैं।

अभी लोग स्वास्थ्य केंद्रों में जाना डाल रहे हैं, जिससे नवजात शिशुओं और बच्चों के वैक्सीनेशन पर भी प्रभाव पड़ा है। ऐसी गलती न करें, क्योंकि बच्चों को समय पर टीका न मिलने पर आने वाले समय में गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। मौजूदा कोरोना संक्रमण से खुद को बचाना अच्छी बात है, लेकिन इस क्रम में अन्य बीमारियों या संक्रमणों से आंख मूंद लेना अच्छी बात नहीं है।

 

Share Now

One Reply to “डिप्थीरिया क्या है : डिप्थीरिया के लक्षण, रोकथाम, उपचार”

  1. Pingback: दादी मां के नुस्खे: कई बीमारियों में घरेलू इलाज - All Gk Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *