By | September 9, 2020

कार्ल सैगन ने हमारे सौरमंडल, पृथ्वी व चन्द्रमा की उत्पत्ति तथा धरती पर जीवन के विकसित होने की कहानी बताते हुए कहा था, “ब्रह्मांड को जानने के लिए हम खुद एक जरिया है क्योंकि ब्रह्मांड हमारे अंढर है, हम सभी तारों की धूल से जन्मे हैं।

यही सत्य है कि न केवल मानव बल्कि पूरी पृथ्वी का जीवन (जिसमें पेड़-पौधे, पशु- पक्षी सहित वे सारे खनिज पदार्थ शामिल हैं जो धरती की खुदाई पर मिलते हैं) और इस पर मिलने वाला सभी कुछ तारों की बची हुई राख से पेढ़ा हुए है। ये कैसे हुआ इसके लिए हमें तारों के बनने और उनके अंत होने की कहानी को समझना होगा।

तारों का अंत – ब्लैकहोल

एक सीमा के बाद तारे के अंदर का ण्‌ पूरा ईंधन समाप्त होकर इस स्तर पर पहुंच जाता है कि वह और संलयित होकर भारी तत्त्व नहीं बना सकता। इससे तारा ठंडा होने लगता है और अंत होने लगता है। तारे का अंत कई तरह से हो सकता है। अगर कोई तारा हमारे सूर्य से कई गुणा अधिक भारी है तो वह ब्लैक होल में बदल सकता है। ब्लैक होल में तारे के अंदर का सारा पदार्थ एक इतने छोटे केन्द्र में सिमट जाता है कि वहां पर सिंगुलरिटी (एक सुई की नोक जितने हिस्से में अनंत वजन का इकट्ठा होना) पैदा हो जाती है।

सुपरनोवा

कई बार तारे ब्लैकहोल में नहीं बदलते, बल्कि तारों के अंदर भारी तत्व इतने अधिक हो जाते हैं कि तारा स्वयं को स्थिर रखने में विफल होने लगता है। ऐसे में तारे एक विस्फोट के साथ फट जाते है। इस घटना को सुपरनोवा कहा जाता है।

इस घटना में हमारे सूर्य से भी लाखों- करोड़ों गुणा ऊर्जा, प्रकाश और चमक पैदा होती है। इस विस्फोट में तारे में बने भारी तत्व अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। कई बार ये एलीमेंट्स मृत तारों के आसपास की धूल, गैस व अन्य तत्वों के साथ मिलकर नए सौरमंडल के निर्माण का कारण बनते हैं।

सुपरनोवा से जन्मा था हमारा सोरमंडल

नासा के अनुसार आज से लगभग 4.5 खरब वर्ष पूर्व एक मृत तारा सुपरनोवा विस्फोट से फट गया, उसी के अवशेष से हमारे सूर्यमंडल का निर्माण हुआ था। आज पृथ्वी पर हम जो कुछ भी देखते हैं, वे सभी कुछ उस मृत तारे के अवशेषों से ही बने हैं। उस मृत तारे में बने कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसे गेसीय तत्वों से पृथ्वी पर एककोशिकीय सूक्ष्म जीव पैदा हुए। इन्हीं सूक्ष्म जीवों से पृथ्वी पर जीवन का आरंभ हुआ जो करोड़ों वर्षों बाद आज इस तरह दिखाई देता है।

ऐसे हुआ जलकण तथा हीरे का जन्म

आज हर वस्तु चाहे वह पेड़-पौध हों, जीव-जंतु हों, सब कुछ पृथ्वी की अपनी नहीं है। फिर भी कुछ चीजें ऐसी हैं जो पृथ्वी की अपनी कही जा सकती है- जैसे हीरा और पानी। पृथ्वी में कई किलोमीटर नीचे अत्यधिक दाब व ताप पर कार्बन हीरे में बदल गया। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के परमाणुओं ने मिलकर जल का निर्माण किया। पेट्रोलियम पदार्थों का निर्माण जमीन में दबे पेड़-पोधों से पृथ्वी पर ही हुआ पर इन्हें बनाने वाले मूल तत्व उसी मृत तारे से धरती तक पहुंचे थे।

यहां बनते हैं ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन व लोहा

ब्रह्याण्ड वस्तुत परमाणु का निर्माण करने वाले सूक्ष्मतम कणों तथा हाइड्रोजन से बना है। ब्रह्माण्ड में सूर्य जेसे अनगिनत तारे हैं जो हाइड्रोजन को हीलियम में बदलते हुए लगातार ऊष्मा पैदा कर रहे हैं। इन तारों से अन्य ग्रह व उपग्रह रोशनी और ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

जब किसी तारे में मौजूद पूरी हाइड्रोजन संलयित (दो या अधिक परमाणुओं का मिलकर एक भारी परमाणु में बदलना) होकर हीलियम में बदल जाती है तब हीलियम के संलयित होने पर और भी अधिक भारी तत्व जैसे कार्बन, लोहे व अन्य का निर्माण होने लगता है।

ऐसा सिर्फ हमारे साथ नहीं हुआ

जब ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ तब केवल क्वार्क कण थे। इन्हीं से हाइड्रोजन गैस बनी। यह संलयित होकर हीलियम बनी और ब्रह्माण्ड में प्रकाश का जन्म हुआ। उससे पहले सृष्टि में अंधकार था। तारों के संलयन से अन्य तत्व बने। सृष्टि के आरंभ में जन्मे तारों में बने भारी तत्व उनकी मृत्यु पर बिखरने लगे, तब नवीन तारे बने।

ऐसे पता लगती उनकी उम्र

बर्तमान में वैज्ञानिक इन तत्त्वों के आधार पर बता सकते हैं कि कोई तारा कितना पुराना है। सृष्टि के आरंभ में बनने वाले तारों में भारी तत्त्वों का अभाव था, जबकि बाद की पीढ़ी में बनने वाले तारों में भारी तत्त्व देखने को मिलते हैं। इन तारों में जितने अधिक भारी तत्त्व होंगे, वह तारा उतना ही युवा होगा

Share Now

2 Replies to “सौर मंडल: तारों की धूल से जन्मे हैं हम”

  1. Pingback: Most Important कृषि से संबंधित क्वेश्चन आंसर 2020 - All Gk Hindi

  2. Pingback: इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम क्या है ? Best Tips Irritable bowel syndrome 2020 - All Gk Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *