Main Parts of A Cell - कोशिका के मुख्य भाग

कोशिका के मुख्य भाग एवं उनके कार्य (Main parts of a cell )

Main Parts of A Cell - कोशिका के मुख्य भाग

कोशिका के मुख्य 11 भाग होते हैं जो इस प्रकार हैं

1. कोशिका भित्ति (Cell well)
2. कोशिका झिल्ली (Cell membrane)
3. तारक काय (Centrosome)
4. अंत: प्रदव्य जालिका (Endiolasmic Reticulum)
5. राइबोसोम (Ribosome)
6. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)
7. गॉल्जीकाय (Golgi Body)
8. लाइसोसोम (Lysosome)
9. लवक (Plastid)
10. रसधानी (Vacuoles)
11.केंद्रक (Nucleus)

1. कोशिका भित्ति (Cell well)

💠कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिका में पाई जाती है
💠 कोशिका भित्ति सैलूलोज का बना होता है
💠यह कोशिका को निश्चित आकृति एवं आकार बनाए रखने में सहायक होता है
💠 जीवाणु का कोशिका भित्ति पेण्टिडोगलकेन का बना होता है

2. कोशिका झिल्ली (Cell membrane)

💠कोशिका के सभी अवयव एक पतली झिल्ली के द्वारा घिरे रहते हैं
💠 इस चिल्ली को कोशिका झिल्ली कहते हैं
💠 यह अर्धपारगम्य झिल्ली होती है
💠 कोशिका झिल्ली का मुख्य कार्य कोशिका के अंदर जाने वाले एवं अंदर से बाहर आने वाले पदार्थों का निर्धारण करना है

3. तारक काय (Centrosome)

💠 तारककाय की खोज बोवेरी ने की थी
💠 यह केवल जंतु कोशिकाओं में पाया जाता है
💠तारककाय के अंदर एक या दो कण जैसी रचना होती है जिससे सेंट्रियोल कहते हैं
💠समसूत्री विभाजन में यह ध्रुव का निर्माण करता है

4. अंत: प्रदव्य जालिका (Endiolasmic Reticulum)

💠एक और यह केंद्रक झिल्ली से व दूसरी और कोशिका कला से संबंध होता है
💠इस जालिका के कुछ भागों पर किनारे-किनारे छोटी-छोटी कणिकाएं लगी रहती है जिसे राइबोसोम कहते हैं
💠ई.आर. का मुख्य कार्य उन सभी वसाओं व प्रोटीनो  का संचरण करना है जो कि विभिन्न झिल्लियों जैसे कोशिका झिल्ली, केंद्रक झिल्ली आदि का निर्माण करते हैं

5. राइबोसोम (Ribosome)

💠सर्वप्रथम रॉबिंन्सन ने एवं ब्राउन ने 1953 ईस्वी में पादप कोशिका में तथा जी. ई.पैलाडे ने 1955 ईस्वी में जंतु कोशिका में राइबोसोम को देखा और 1958 में रावर्ट ने इसका नामकरण किया
💠यह राइबो न्यूक्लिक एसिड नामक अम्ल व प्रोटीन की बनी होती है
💠यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए उपर्युक्त स्थान प्रदान करती है
💠अर्थात यह प्रोटीन का उत्पादन स्थल है इसलिए इसे प्रोटीन की फैक्ट्री भी कहा जाता है

6. माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria)

💠इसकी खोज अल्टमैन ने 1886 ईसवी में की थी
💠 बैंडा ने इसका नाम माइटोकॉन्ड्रिया दिया
💠 यह कोशिका का श्वसन स्थल है
💠 कोशिका में इसकी संख्या निश्चित नहीं होती है
💠ऊर्जा युक्त कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया में होता है जिससे काफी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है

7. गॉल्जीकाय (Golgi Body)

💠इसकी खोज कैमिलो गाँल्जी नामक वैज्ञानिक ने की थी
💠यह सुक्ष्म नलिकाओं के समूह एवं थैलियों का बना होता है
💠गाँल्जी कांम्पलेक्स में कोशिका द्वारा संश्लेषित प्रोटीन व अन्य पदार्थों की पुटिकाओं के रूप में पैकिंग की जाती है । ये पुटिकाएँ गंतव्य स्थान पर उस पदार्थ को पहुंचा देती है ।यदि कोई पदार्थ कोशिका से बाहर स्त्रावित होता है तो उस पदार्थ वाली पुटिकाएँ उसे कोशिका झिल्ली के माध्यम से बाहर निकलवा देती है
💠इस प्रकार गॉल्जीकाय को हम कोशिका के अंणुओ का यातायात प्रबंधक भी कहते हैं । ये कोशिका भित्ति एवं लाइसोसोम का निर्माण भी करते हैं

8. लाइसोसोम (Lysosome)

💠 इसकी खोज डी-डुवे नामक वैज्ञानिक ने की थी
💠 यह सूक्ष्म गोल एकहरी झिल्ली से गिरी थैली जैसी रचना होती है । इसका सबसे प्रमुख कार्य बाहरी पदार्थों का भक्षण एवं पाचन करना है
💠 इसमें 24 प्रकार के एंजाइम पाए जाते हैं
💠 इसे आत्मघाती थैली भी कहा जाता है

9. लवक (Plastid)

💠 यह केवल पादप कोशिका में पाए जाते हैं

10. रसधानी (Vacuoles)

💠यह कोशिका की निर्जीव रचना है । इसमें तरल पदार्थ भरी होती है । जंतु कोशिकाओं में यह अनेक व बहुत छोटी होती है परंतु पादप कोशिका में प्राय बहुत बड़ी केंद्रक में स्थित होती है

11.केंद्रक (Nucleus)

💠 यह कोशिका का सबसे प्रमुख अंग होता है
💠 यह कोशिका के प्रबंधक के समान कार्य करता है
💠केंद्रक द्रव्य में धागे नुमा पदार्थ जाल के रूप में बिखरा दिखलाई पड़ता है इसे क्रोमेटिंन कहते हैं
💠यह प्रोटीन एवं डीएनए का बना होता है कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिंन सिकुड़ कर अनेक मोटे व  छोटे धागे के रूप में संगठित हो जाते हैं
💠 इन धागों को गुणसूत्र कहते हैं
💠प्रत्येक जाति के जीव धारियों में सभी कोशिकाओं के केंद्रक में गुणसूत्र की संख्या निश्चित होती है जैसे मानव में 23 जोड़ा, चिंपांजी में 24 जोड़ा, बंदर में 21 जोड़ा ।

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