Geography of rajasthan in hindi - राजस्थान का परिचय

Geography of rajasthan in hindi - राजस्थान का परिचय के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर All Rajasthan Competition Exam Raj.Police, patwar.
Geography of rajasthan in hindi - राजस्थान का परिचय

राजस्थान का परिचय व नामकरण  

💠राजस्थान का पश्चिमी रेगिस्तान तथा रेगिस्तान में स्थित खारे पानी की झीले ‘टेथिस सागर‘ के अवशेष हैं

💠राजस्थान का मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्र अरावली पर्वतमाला एवं दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग गोंडवाना लैंड के अवशेष है।

💠राजस्थान की अधिकांश भू-पृष्ठीय सरचना टेथिस सागर का अवशेष है।

💠राजस्थान का वर्तमान स्वरूप 7 चरणों में हुए एकीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप 1 नवंबर 1956 को हमारे सामने आया।

💠राजस्थान का नामकरण ऋग्वेद में राजस्थान में स्थित भू-भाग को ‘ब्रह्मवर्त’ व रामायण काल में वाल्मीकि ने मरुकान्तर नाम दिया, तो राजस्थान को मरू/ मरू प्रदेश / मरूवार/ रायथान/ राजपूताना / रजवाड़ा आदि अन्य नामों से आज तक जाना जाता है।

💠राजस्थान के परिचय में सर्वप्रथम आयरलैंड के निवासी ‘जॉर्ज थॉमस’ ने स्वतंत्र रूप से  ग्वालियर के पश्चिम में स्थित राजपूत रियासतों के समूह को सन 1800 ई. में “राजपूताना” नाम से संबोधित किया ।

💠जॉर्ज थॉमस ग्वालियर के मराठा शासक दौलतराव सिंधिया का अंग्रेजी कमांडर था।

💠1805 ई. में विलियम फ्रैंकलिन ने अपनी पुस्तक “मिलिट्री मेम्बायर्स ऑफ मिस्टर जॉर्ज थॉमस” में लिखा कि जॉर्ज थॉमस वह पहला व्यक्ति था जिसने राजपूताना शब्द का प्रयोग किया अर्थात राजपूताना शब्द का सर्वप्रथम लिखित प्रमाण हमें 1805 ई. में मिलता है।

💠ब्रिटिश काल या मध्यकाल में राजस्थान को राजपूताना के नाम से जाना जाता था।

💠राजस्थान शब्द का प्राचीनतम उल्लेख खीमल माता मंदिर बसंतगढ़ सिरोही पर उत्कीर्ण ‘बसंतगढ़ शिलालेख’ में मिलता है ।
💠जहां “राजस्थानांयादित्य” शब्द का प्रयोग किया गया था।
💠बसंतगढ़ शिलालेख चावड़ा वंश के शासक वर्मलात के शासनकाल में दास प्रथा पर उत्कीर्ण था।

💠राजस्थान का प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ मुहणौत नैणसी री ख्यात व राजरूपक (वीरभाण द्वारा रचित) ग्रंथ में पहली बार “राजस्थान” शब्द का प्रयोग हुआ था।

💠मुहणौत नैणसी को राजस्थान का अबुल फजल कहा जाता है ।

💠1791 में जोधपुर के महाराजा भीम सिंह ने मराठों के विरुद्ध संयुक्त कार्यवाही करने के लिए जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह को लिखे गए पत्र में ‘राजस्थान’ अर्थात राजस्थानियों में एकता की इच्छा प्रकट की थी।

💠राजस्थान के इतिहास का जनक-कर्नल जेम्स टॉड
💠घोड़े वाले बाबा-कर्नल जेम्स टॉड

💠कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘एनाल्स एंड एंटीक्विटीज आफ राजस्थान’ या ‘द सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया’ में इसे राजस्थान, रजवाड़ा, रायथान नाम दिया था।

💠कर्नल टॉड की इस पुस्तक का संपादन कार्य विलियम क्रुक ने एवं इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद पं. डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने किया था।

💠कर्नल जेम्स टॉड ही 19वीं शताब्दी का प्रथम इतिहासकार था जिसने राजस्थान की सामंती व्यवस्था / जागीरदारी व्यवस्था / जमींदारी व्यवस्था / फ़्यूडलिज्म पर विस्तार से लिखा।

💠कर्नल जेम्स टॉड को राजस्थान का पितामह / राजस्थान के इतिहास का जनक कहा जाता है ।
💠"एनाल्स एंड एंटीक्विटीज आफ राजस्थान पुस्तक" को कर्नल जेम्स टॉड ने अपने गुरु जयन्ति ज्ञानचंद को समर्पित की थी।

💠आप पढ़ रहे हैं राजस्थान का परिचय व नामकरण पहली बार राजस्थान शब्द का प्रयोग राजस्थान के एकीकरण के द्वितीय चरण 25 मार्च 1948 को गठित पूर्व राजस्थान संघ में किया गया।

💠26 जनवरी 1950 ई. को भारत सरकार ने इसे राजस्थान राज्य की मान्यता प्रदान की एवं राजधानी जयपुर को सत्यनारायण समिति के आधार पर बनाई, क्योंकि इस दिन भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ था।

💠30 मार्च 1949 ई. को चार बड़ी रियासते जयपुर जोधपुर जैसलमेर व बीकानेर का एकीकरण हुआ एवं लगभग वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ था इसलिए प्रतिवर्ष राजस्थान दिवस 30 मार्च को मनाया जाता है।

💠राजस्थान के पूर्ण एकीकरण के समय अर्थात 1 नवंबर 1956 को संपूर्ण एकीकरण के पश्चात इसका वर्तमान स्वरूप बना ।

💠राजस्थान स्थापना दिवस 1 नवंबर को मनाया जाता है।

💠स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान में 1930 रियासतें 3 ठिकाने (लावा नीमराणा कुशलगढ़)एवं अजमेर मेरवाड़ा केंद्र शासित प्रदेश थे

💠 राजस्थान के एकीकरण के चौथे चरण में 30 मार्च 1949 को राज्य की चार बृहद रियासतों जोधपुर जयपुर बीकानेर एवं जैसलमेर के विलय से एकीकरण का अधिकांश कार्य पूर्ण हुआ इस इकाई का नाम बृहद राजस्थान रखा गया।

इस तरह यह हमारा राजस्थान का परिचय और नामकरण हुआ

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