Rajasthan Painting आधुनिक चित्रकार ( राजस्थान की चित्रकला )

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आज हम बात करने वाले हैं Rajasthan Painting ( राजस्थान की चित्रकला ) और उनके बारे में कुछ जानकारी ।
राजस्थान आधुनिक चित्रकार (Prominent modern painter of rajasthan)

Rajasthan Painting ( राजस्थान की चित्रकला )

1. पद्मश्री. स्व रामगोपाल विजयवर्गीय

राजस्थान में आधुनिक चित्रकला के सटीक हस्ताक्षर पद्मश्री (1984) श्री रामगोपाल का जन्म 1905 ई. में सवाईमाधोपुर जिले के बालेर गाँव में हुआ था।

रामगोपाल को परम्परावादी चित्रकार की उपलब्धि मिली। उनके कलागुरु शैलेन्द्रनाथ डे थे। राजस्थान एकल चित्र प्रदर्शनी प्रारम्भ करने का श्रेय स्व. विजयवर्गीय को ही जाता है।

2. स्व. श्री भूरसिंह शेखावत (गाँवों का चितेरा)

बीकानेर जिले के धोलिया गाँव में 1914 ई. में जन्मे भूरसिंह शेखावत को ‘राजस्थानी जनजीवन के यथार्थ चित्रकार के रूप में ख्याति मिली।

3. स्व. गोवर्धन लाल ‘बाबा’ (भीलों का चितेरा)

राजसमन्द जिले के कांकरोली में 1914 ई. में जन्मे गोवर्धन लाल बाबा’ ने मेवाड़ी भील संस्कृति को अपनी तूलिका से जीवन्त रूप में चित्रांकित किया। ‘बाबा’ का प्रसिद्ध चित्र ‘बारात’ है।

4. कृपाल सिंह शेखावत (ब्लू पॉटरी के जादूगर)

कृपाल सिंह शेखावत को ब्लू पॉटरी में पद्म श्री पुरस्कार मिला था । कृपाल सिंह शेखावत का जन्म स्थान सीकर जिले के मऊ गाँव मे था कृपाल सिंह शेखावत के गुरु का नाम स्व.भूरसिंह शेखावत के शिष्य हैं।

राजस्थान में ब्लू पॉटरी के पुनरुद्धारकर्ता श्री शेखावत का कार्यक्षेत्र जयपुर रहा है। आपने जयपुर की ब्लू पॉटरी को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया। परम्परागत ब्लू पॉटरी में जहाँ नीले एवं हरे ही रंगों का प्रयोग होता था श्री कृपाल ने इसमें 25 रंगों का प्रयोग करके ‘कृपाल शैली’ का विकास किया है।

5. परमानन्द चोयल (भैंसों का चितेरा)

कोटा में जन्मे प्रयोगवादी चित्रकार परमानन्द चोयल ने भैंसों पर

विविध चित्र बनाकर ख्याति अर्जित की है। श्री चोयल की कार्यस्थली उदयपुर रही है। श्री चोयल को वर्ष 2007 में राष्ट्रीय ललित कला अकादमी ने ‘ललित कला रत्न पुरस्कार’ प्रदान किया है।

6. सौभागमल गहलोत (नीड़ का चितेरा)

जयपुर के पक्षी प्रेमी चित्रकार श्री सौभागमल गहलोत ने पक्षियों के घोंसलों पर आधारित विविध चित्र बनाए हैं। इनकी ख्याति नीड़ के चित्र के रूप में है।

7. मास्टर कुंदन लाल मिस्त्री

श्री मिस्त्री ने उदयपुर में महाराणा प्रताप का एक चित्र (पोट्रेट) बनाया, जो शीघ्र ही लोकप्रिय हुआ। इसी चित्र की प्रकृति देश के प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई।

8. जगमोहन माथोड़िया (श्वानों का चितेरा)

राजस्थान के युवा चित्रकार जयपुर के जगमोहन माथोड़िया ने वर्ष 2003 तक एक ही विषय ‘श्वान’ (कुत्ता) पर 503 चित्र बनाए हैं। इन चित्रों में विविध प्रकार के लगभग 3900 श्वानों को बखूबी से चित्रित किया गया है।

9. डॉ. वीरबाला भावसार

बांसवाड़ा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्व. धूलजी भाई की पुत्री डॉ. वीरबाला भावसार ने रित एवं फेविकोल’ के माध्यम से चित्र बनाने की नई कला का ईजाद किया है।

10. कैलाशचन्द्र शर्मा (जैनी शैली के जादूगर)

राजस्थान के कैलाश चंद्र शर्मा को जैन शैली के लघु में देश भर में ख्याति मिली हुई है। चित्र बनाने 1990 ई. में श्री शर्मा द्वारा जैन चित्र शैली में कालिदासकृत रघुवंश’ महाकाव्य का चित्र का बहुत प्रसिद्ध हुआ।

11. ए.एच. मूलर

जर्मन चित्रकार ए.एच. मूलर का आधुनिक राजस्थानी चित्रकला के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। मूलर द्वारा बनाए हुए प्रमुख चित्र बीकानेर संग्रहालय में सुरक्षित हैं।

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